SBI Full Form In Hindi

हेलो दोस्तों हम आज इस आर्टिकल में देखने वाले हैं SBI FULL FORM IN HINDI हम इस पोस्ट में आपको SBI से जुडी हर चीज़ें , हर सुचना आपको बताने वाले हैं । तो अंत तक बने रहे हमारे साथ इस पोस्ट में । आपको सारी जानकारी मिल जाएगी।

SBI क्या है ?

SBI- State Bank Of India

भारतीय स्टेट बैंक, जिसे एसबीआई के नाम से जाना जाता है, 200 से अधिक वर्षों के गौरवशाली इतिहास के साथ भारत का सबसे बड़ा वाणिज्यिक बैंक है। भारतीय स्टेट बैंक परिचय (एसबीआई), भारत सरकार के स्वामित्व में, एक भारतीय बहुराष्ट्रीय, सार्वजनिक क्षेत्र की बैंकिंग और वित्तीय सेवा कंपनी के रूप में वर्गीकृत है, जिसका मुख्यालय मुंबई, महाराष्ट्र में स्थित है।

भारतीय स्टेट बैंक परिचय अध्याय भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) के बारे में एक संक्षिप्त परिचय देता है भारत में 14,000 से अधिक शाखाओं के साथ, एसबीआई संपत्ति, जमा, लाभ, शाखाओं, ग्राहकों और कर्मचारियों द्वारा भारत में सबसे बड़ी और प्रीमियम बैंकिंग और वित्तीय सेवा कंपनी है। एसबीआई ने 36 देशों में फैले 191 विदेशी कार्यालयों के साथ विश्व स्तर पर अपनी जड़ें जमा ली हैं और अपनी जड़ें जमा ली हैं।

SBI का इतिहास

एसबीआई (SBI), सबसे पुराना वाणिज्यिक बैंक, 19 वीं शताब्दी (ब्रिटिश भारत) में अपने वंश का पता लगाता है, जब बैंक ऑफ कलकत्ता की स्थापना 1806 में हुई थी। 1921 में, बैंक ऑफ कलकत्ता, मद्रास और बॉम्बे के बैंकों के साथ विलय कर इम्पीरियल बैंक ऑफ इंडिया बना। भारत। 1955 में, जब भारत सरकार ने आरबीआई के साथ इंपीरियल बैंक का राष्ट्रीयकरण किया, तो इंपीरियल बैंक ने भारतीय स्टेट बैंक का नाम हासिल कर लिया। अपनी शुरुआत के बाद से, एसबीआई सबसे आदर्श डिग्री के लिए अत्यधिक ग्राहक संतुष्टि प्रदान करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है।

अपने स्थापना काल में स्टेट बैंक के कुल 480 कार्यालय थे जिसमें शाखाएं, उप शाखाएं तथा तीन स्थानीय मुख्यालय शामिल थे, जो इम्पीरियल बैंकों के मुख्यालयों को बनाया गया था। 1926 में यंग की अनुशंसा पर 1 अप्रैल 1935 को आरबीआई की स्थापना की गई जबकि इसका राष्ट्रीयकरण 1 जनवरी 1949 को किया गया इसका मुख्यालय मुंबई में है आरबीआई के पहले गवर्नर सर ओसबोर्न स्मिथ हैं जबकि वर्तमान में इस के गवर्नर शक्तिकांत दास हैं कार्य नोट का निर्गमन वर्तमान में आरबीआई 1957 में प्रचलित न्यूनतम रिजर्व प्रणाली के आधार पर ₹2 से लेकर ₹2000 तक का नोट का निगमन करती है जबकि ₹1 के नोट का निगमन भारत सरकार के द्वारा किया जाता है

2 जून 1806 को कलकत्ता में ‘बैंक ऑफ़ कलकत्ता’ की स्थापना हुई थी। 3 वर्षों के पश्चात इसको चार्टर मिला तथा इसका पुनर्गठन बैंक ऑफ़ बंगाल के रूप में 2 जनवरी 1809 को हुआ। यह अपने तरह का अनोखा बैंक था जो साझा स्टॉक पर ब्रिटिश इंडिया तथा बंगाल सरकार द्वारा चलाया जाता था। बैंक ऑफ़ बॉम्बे तथा बैंक ऑफ़ मद्रास की शुरुआत बाद में हुई। ये तीनों बैंक आधुनिक भारत के प्रमुख बैंक तब तक बने रहे जब तक कि इनका विलय इंपिरियल बैंक ऑफ़ इंडिया में 27जनवरी 1921 को नहीं कर दिया गया। सन 1951 में पहली पंचबर्षीय योजना की नींव डाली गई जिसमें गांवों के विकास पर जोर डाला गया था। इस समय तक इंपिरियल बैंक ऑफ़ इंडिया का कारोबार सिर्फ़ शहरों तक सीमित था। अतः ग्रामीण विकास के मद्देनजर एक ऐसे बैंक की कल्पना की गई जिसकी पहुंच गांवों तक हो तथा ग्रामीण जनता को जिसका लाभ हो सके। इसके फलस्वरूप भारत सरकार द्वारा इंपीरियल बैंक ऑफ इंडिया का अधिग्रहण (नाम बदलकर) कर इसका नाम ‘भारतीय स्टेट बैंक’ रखा गया। अपने स्थापना काल में भारतीय स्टेट बैंक के कुल 480 कार्यालय थे जिसमें शाखाएँ, उप शाखाएँ तथा 3 स्थानीय मुख्यालय शामिल थे, जो इम्पीरियल बैंकों के मुख्यालयों से बनाया गया था।

SBI के कार्य

शाखाओं में कार्यरत बैंक के सहायक प्रबंधक से उप महाप्रबंधक श्रेणाी तक के सभी अधिकारियों को उनके पद के आधार पर कतिपय वित्तीय अधिकार दिए गए हैं। विभिन्न श्रेणी के अधिकारियों को वित्तीय अधिकारों के प्रत्यायोजन का निर्णय केंद्रीय बोर्ड द्वारा किया जाता है। संगठन की जरूरतों एवं सरकार/भारतीय रिज़र्व बैंक के दिशा-निर्देशों के आधार पर समय-समय पर इन अधिकारों में संशोधन किया जाता है।

कोई ऋण संस्वीकृत किया जाए अथवा नहीं, यह बैंक के संबंधित संस्वीकृतिकर्ता प्राधिकारी का विवेकाधिकार होता है। प्रत्येक मामले के संबंधित तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रखने के बाद इस विवेकाधिकार का प्रयोग किया जाता है।

SBI में पर्यवेक्षण एवं उत्तरदायित्व के स्तर सहित निर्णयन-प्रक्रिया में अपनाई जाने वाली कार्यविधि

निर्णयन-प्रक्रिया के मामले में बैंक में एक सुपरिभाषित प्रणाली मौजूद है। शाखा के सहायक प्रबंधक (ऋण) से लेकर उप महाप्रबंधक तक विभिन्न स्तरों पर वित्तीय निर्णय लिए जाते हैं। इन स्तरों से भिन्न निर्णय समिति के माध्यम से लिए जाते हैं। शाखाओं को विपणन इकाइयों के रूप में पुन: स्थापित करने के लिए कतिपय सीमा तक वैयक्तिक एवं लघु उद्योग व्यवसाय खंडों के अंतर्गत ऋणों की संस्वीकृति हेतु केंद्रीकृत ऋण प्रस्ताव कार्रवाई कक्षों का गठन किया जा रहा है। शाखाएँ आवेदन अपने पास रखेंगी तथा वे उन्हें संबंधित ऋण प्रस्ताव कार्रवाई कक्षों को उनके विचारार्थ अथवा अन्य कार्रवाई के लिए भेजेंगी। इसके अलावा, एक सुपरिभाषित संगठनात्मक संरचना एवं उत्तरदायित्व की सुस्पष्ट प्रणाली मौजूद है जो भारतीय रिज़र्व बैंक/केंद्रीय सतता आयोग के दिशा-निर्देशों को ध्यान में रखती है। प्रत्येक अधिकारी को अधिकारों के प्रत्यायोजन की योजना के अनुसार ऋण-प्रस्तावों पर विचार कर निर्णय लेना होता है। सभी संस्वीकृत ऋणों की सूचना नियंत्रण के प्रयोजन से उच्चतर प्राधिकारी को देनी होती है। अधिकारों के प्रत्यायोजन की उचित प्रणाली एवं नियंत्रण विवरणियों की प्रस्तुति पर नियंत्रकों द्वारा नजर रखी जाती है एवं यह कार्य लेखा-परीक्षा के माध्यम से भी किया जाता है।

कार्य-निष्पादन के लिए भारतीय स्टेट बैंक(SBI) द्वारा निर्धारित मानदंड

कारपोरेट केंद्र विभिन्न समयावधियों की जमाराशियों के लिए बैंक द्वारा दी जाने वाली दरें निर्धारित करता है जिन्हें बैंक की वेबसाइट एवं शाखाओं में प्रदर्शित किया गया है। अग्रिमों के मामले में कारपोरेट केंद्र विभिन्न ऋण उत्पाद शुरू करने के बारे में निर्णय लेता है। इन उत्पादों का विवरण बैंक की वेबसाइट एवं शाखाओं में उपलब्ध है। कारपोरेट केंद्र विभिन्न अग्रिमों की ब्याज दरें भी निर्धारित करता है जो बैंक की वेबसाइट तथा बैंक के कार्यालयों/शाखाओं में उपलब्ध है।

कोई ऋण संस्वीकृत किया जाए अथवा नहीं, यह बैंक के संबंधित संस्वीकृतिकर्ता प्राधिकारी का विवेकाधिकार होता है। प्रत्येक मामले के संबंधित तथ्यों एवं परिस्थितियों को ध्यान में रख कर इस विवेकाधिकार का प्रयोग किया जाता है।

SBI का मुख्यालय

भारतीय स्टेट बैंक(SBI) का मुख्यालय कोर्पोरेट सेंटर,मैडम कामा रोड,मुंबई में स्थित हैl

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