RBI Full Form In Hindi

RBI (आरबीआई): Reserve Bank of India (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया)

हेलो दोस्तों हम आज इस आर्टिकल में देखने वाले हैं RBI FULL FORM IN HINDI हम इस पोस्ट में आपको RBI  से जुडी हर चीज़ें , हर सुचना आपको बताने वाले हैं । तो अंत तक बने रहे हमारे साथ इस पोस्ट में । आपको साडी जानकारी मिल जाएगी।

RBI भारत का केन्द्रीय बैंक है। RBI Ka Full Form या मतलब ‘Reserve Bank of India (रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया)’ होता है जो भारत के सभी बैंकों का संचालक है। इसे बैंकों का बैंक भी कहते है जो भारतीय रूपये को जारी करने और आपूर्ति को नियंत्रित करने का कार्य करता है। RBI भारत के आर्थिक रणनीतिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।

प्रत्येक देश का अपना एक केंद्रीय बैंक होता है इसी तरह भारत का भी एक केंद्रीय बैंक है जिसका नाम RBI है। जो भारत के सभी बैंको का संचालन करता है। यह बैंक भारत की अर्थव्यवस्था (Economy) को नियंत्रित करने का कार्य करता है। भारत की सारी मुद्रा का हिसाब RBI के पास ही रहता है। RBI Ka Pura Naam या आरबीआई की फुल फॉर्म ‘रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया’ है। RBI मुद्रा छापने का काम करती है तथा मुद्रा पहुँचाने का काम भी करती है। यह बैंक “Asian Clearing Union” का सदस्य है। आरबीआई को भारत का प्रधानमंत्री नियंत्रित करता है, इसके पुरे देशभर में कुल 29 क्षेत्रीय कार्यालय है। भारतीय रिजर्व बैंक का मुख्यालय मुंबई है जिसके वर्तमान में गवर्नर ‘शक्तिकांत दास’ है।

RBI की स्थापना

भारतीय रिज़र्व बैंक (Reserve Bank of India-RBI) की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक अधिनियम, 1934 के प्रावधानों के अनुसार 1 अप्रैल, 1935 को हुई थी। शुरुआत में रिज़र्व बैंक का केंद्रीय कार्यालय कोलकाता में स्थापित किया गया था जिसे वर्ष 1937 में स्थायी रूप से मुंबई में स्थानांतरित कर दिया गया। केंद्रीय कार्यालय वह कार्यालय है जहाँ RBI का गवर्नर बैठता है और जहाँ नीतियाँ निर्धारित की जाती हैं। यद्यपि प्रारंभ में यह निजी स्वमित्व वाला था, वर्ष 1949 में RBI के राष्ट्रीयकरण के बाद से इस पर भारत सरकार का पूर्ण स्वामित्व है।

RBI के मुख्य कार्य-

बैंकों का बैंक:

भारतीय रिज़र्व बैंक अन्य वाणिज्यिक बैंकों (Commercial Banks) के लिए उसी तरह कार्य करता है जिस तरह से अन्य बैंक आमतौर पर अपने ग्राहकों के लिए कार्य करते है, यह भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रमुख्य कार्य में आता है। यह देश के सभी वाणिज्यिक बैंकों को पैसा उधार देता है।

बैंकों के लिये ऋणदाता का कार्य:

भारतीय रिज़र्व बैंक सभी अनुसूचित बैंकों के बैंक अकाउंट रखता है और जरूरत पड़ने पर उनके लिये अंतिम ऋणदाता का कार्य भी करता है।

नोट जारी करना:

आरबीआई को देश में नोट छापने का एकाधिकार प्राप्त है, लेकिन एक रूपए के नोट को छोड़कर सभी तरह के नोट ही जारी करने का अधिकार है, क्योंकि एक रूपए के नोट केवल वित्त मंत्रालय द्वारा जारी किया जाता है। नोटों को जारी करने/छपाई के लिए भारतीय रिज़र्व बैंक, न्यूनतम रिजर्व प्रणाली (Minimum Reserve System) को अपनाता है।

विदेशी मुद्रा भंडार का संरक्षक:

विदेशी विनिमय दर (Foreign Exchange Rate) को स्थिर रखने के उद्देश्य से RBI विदेशी मुद्राओं को खरीदता और बेचता है और देश के विदेशी मुद्रा भंडार की सुरक्षा भी करता है, विदेशी विनिमय बाज़ार में जब विदेशी मुद्रा की आपूर्ति कम हो जाती है तो आरबीआई इस बाजार में विदेशी मुद्रा बेचता है जिससे की इसकी आपूर्ति बढाई जा सके।

भारतीय सरकार का प्रतिनिधित्व:

भारतीय रिज़र्व बैंक विश्व बैंक (World Bank) और आईएमएफ (IMF) में भारतीय सरकार का प्रतिनिधित्व करता है, यह क्रेडिट नियंत्रण और देश की मौद्रिक नीति को लागू करने के लिए जिम्मेदार है। तो यह थे वो कार्य जो RBI Bank द्वारा किये जाते है।

रिज़र्व बैंक यह कार्य वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड (बीएफएस) के दिशा- निर्देशों के अनुसार करता है। इस बोर्ड की स्थापना भारतीय रिज़र्व बैंक के केंद्रीय निदेशक बोर्ड की एक समिति के रूप में नवंबर 1994 में की गई थी।

भारतीय रिज़र्व बैंक का उद्देश्य

वित्तीय पर्यवेक्षण बोर्ड (बीएफएस) का प्राथमिक उद्देश्य वणिज्य बैंकों, वित्तीय संस्थाओं और गैर- बैंकिंग वित्तीय संस्थाओं सहित वित्तीय क्षेत्र का समेकित पर्यवेक्षण करना है।

भारतीय रिज़र्व बैंक का गठन

इस बोर्ड का गठन केंद्रीय बोर्ड के चार निदेशकों को सहयोजित सदस्य के रूप में दो वर्ष की अवधि के लिए शमिल करके किया गया है तथा गवर्नर इसके अध्यक्ष हैं। रिज़र्व बैंक के उप गवर्नर इसके पदेन सदस्य हैं। एक उप गवर्नर, सामान्यतः बैंकिंग नियमन और पर्यवेक्षण के प्रभारी उप गवर्नर को बोर्ड के उपाध्‍यक्ष के रूप में नमित किया गया है।

बीएफएस की बैठकें

बोर्ड की बैठक सामान्यतः महीने में एक बार आयोजित किया जाना आवश्यक है। इस बैठक के दौरान पर्यवेक्षण विभाग द्वारा प्रस्तुत निरीक्षण रिपोर्ट और पर्यवेक्षण से संबंधित अन्य मामलों पर विचार किया जाता है। लेखा-परीक्षा उप समिति के माध्यम से बैंकिंग पर्यवेक्षण बोर्ड बैंकों और वित्तीय संस्थाओं की सांविधिक लेखा-परीक्षा और आंतरिक लेखा-परीक्षा कार्यों की गुणवत्ता बढ़ाने पर भी विचार करता है। इस उप लेखा- परीक्षा समिति के अध्यक्ष उप गवर्नर और केंद्रीय बोर्ड के दो निदेशक इसके सदस्य होते हैं।

बैंकिंग पर्यवेक्षण बोर्ड बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग (डीबीएस), गैर बैंकिंग पर्यवेक्षण विभाग (डीएनबीएस) और वित्तीय संस्था प्रभाग (एफआईडी) के कार्य- कलापों का निरीक्षण करता है और नियमन तथा पर्यवेक्षण संबंधी मामलों पर निदेश जारी करता है।

सरकार के बैंकर के रूप में भारतीय रिज़र्व बैंक की भूमिका

भारतीय रि‍ज़र्व बैंक अधि‍नि‍यम की धारा 20 की शर्तों में रि‍ज़र्व बैंक को केन्द्रीय सरकार की प्राप्ति‍यां और भुगतानों और वि‍नि‍मय, प्रेषण (रेमि‍टन्स) और अन्य बैंकिंग गति‍वि‍धि‍यां (आपरेशन), जि‍समें संघ के लोक ऋण का प्रबंध शामि‍ल है, का उत्तरदायि‍त्व संभालना है। आगे, भारतीय रि‍ज़र्व बैंक अधि‍नि‍यम की धारा 21 के अनुसार रि‍ज़र्व बैंक को भारत में सरकारी कारोबार करने का अधि‍कार है।

अधि‍नि‍यम की धारा 21 ए के अनुसार राज्य सरकारों के साथ करार कर भारतीय रि‍ज़र्व बैंक राज्य सरकार के लेन देन कर सकता है। भारतीय रि‍ज़र्व बैंक ने अब तक यह करार सि‍क्कि‍म सरकार को छोड़कर सभी राज्य सरकारों के साथ कि‍या है।

भारतीय रि‍ज़र्व बैंक, उसके केन्द्रीय लेखा अनुभाग, नागपुर में केन्द्र और राज्य सरकारों के प्रमुख खातें रखता है। भारतीय रि‍ज़र्व बैंक ने पूरे भारत में सरकार की ओर से राजस्व संग्रह करने के साथ साथ भुगतान करने के लि‍ए सुसंचालि‍त व्यवस्था की है। भारतीय रि‍ज़र्व बैंक के लोक लेखा वि‍भागों और भारतीय रि‍ज़र्व बैंक अधि‍नि‍यम की धारा 45 के अंतर्गत नि‍युक्त एजेंसी बैंकों की शाखाओं का संजाल सरकारी लेनदेन करता है। वर्तमान में सार्वजनि‍क क्षेत्र की सभी बैंक और नि‍जी क्षेत्र की तीन बैंक अर्थात आईसीआईसीआई बैंक लि‍., एचडीएफसी बैंक लि‍. और एक्सिस बैंक लि., भारतीय रि‍ज़र्व बैंक के एजेंट के रूप में कार्य करते हैं। केवल एजेंसी बैंकों की प्राधि‍कृत शाखाएं सरकारी लेनदेन कर सकती हैं।

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