DC Full form in Hindi |DC का Full form क्या होता है?

दोस्तों अगर आपको DC का Full form क्या होता है | DC बारे में कुछ भी जानकारी नहीं है तो  स्वागत है आपका इस आर्टिकल में , क्योंकि  हम लोग जानेंगे कि  DC करेंट क्या है ?, DC का फुल फॉर्म kya होता है?, DC करंट किस तरह से प्रवाहित होता है ,  DC का खोज किसने किया था ?,

तो दोस्तों बने रहे हमारे साथ और  हम  धीरे-धीरे इस आर्टिकल में  आसान और सरल भाषा में जानेंगे इन सारे सवालों के बारे में  हमें आपसे एक अनुरोध है कि आप इस आर्टिकल को लास्ट तक जरूर पढ़ें  तभी आपको पूरी DC के बारे में जानकारी होगी  तो चलिए जानते हैं

DC का Full form क्या होता है?

 हम आपको बता दें कि DC की Full form “Direct Current”  होता  है, DC का हिंदी में  फुल फ्रॉम या मतलब “एकदिश धारा” होता है. AC (Alternating current) और DC (Direct Current) 2 types के  Current होते हैं, जिसका इस्तेमाल बिजली के अलग-अलग  electric appliances के लिए  किया जाता  है. आपके घरों में जो  power light supply  होता है वह AC (Alternating current)  होता है. जब आप  किसी   charger से  mobile phone को  charge करते हैं तो AC Current को चार्जर DC करंट में बदल देता है .  

सोलर एनर्जी से DC “Direct Current” करंट   को उत्पन्न किया जाता है। अगर आप डीसी करंट को DC बल्ब जलाने  के लिए या  DC पंखा को चलाने के लिए  अगर आप डीसी करंट का यूज करते हैं तो काफी क्षति से बच सकते हैं।

और अपना उपकरणों को आप लंबे समय तक चला सकते हैं। अगर आप डीसी करंट को इस्तेमाल करते हैं तो आप काफी फायदे में रहेंगे,  किस करने के फायदे और नुकसान दोनों  होते हैं,  डीसी कॉमेडी स्माल करने से वादा किया है कि अगर आप अपने  उपकरणों के Negative और Positive terminal को सही से  नहीं जोड़ते हैं तो  आपका उपकरण खराब दिया जाता है। इसीलिए डीसी करंट को इस्तेमाल करते समय आप  सावधानी  और ध्यान पूर्वक   इस्तेमाल करें|

DC करेंट क्या है ?

दोस्तो आपको शायद ही मालूम होगा कि DC का मतलब डायरेक्ट करंट होता है, हालाँकि और आमतौर पर  इसे अक्सर “DC करंट” के रूप में या नाम से जाना जाता है। डीसी करंट को इलेक्ट्रिक चार्ज के अनुसार इसे  यूनिडायरेक्शनल फ्लो के रूप में DC कर्रेंट को परिभाषित किया गया है।

आप DC करंट में, में दिखेंगे की इलेक्ट्रॉन ऋणात्मक आवेश के ही क्षेत्र से बिना अपना दिशा बदले  वह धनात्मक आवेश वाले क्षेत्र में आसानी से चला जाता है। क्या आपको मालूम है कि  यह प्रत्यावर्ती धारा (AC) परिपथों के एकदम विपरीत है जहाँ धारा  लगभग दोनों दिशाओं में प्रवाहित हो सकती है। 

DC करंट तार जैसी सामग्री के संचालन के माध्यम से अधिकांश प्रवाहित हो सकता है और साथ ही साथ अर्धचालकों के माध्यम से भी यह आराम से प्रवाहित हो सकता है। दोस्तो  बैटरी DC करेंट का  स्रोत का सबसे अच्छा उदाहरण है। बैटरी में, बैटरी में संग्रहीत इसके अधिक रासायनिक ऊर्जा से उत्पन्न विद्युत ऊर्जा।

जब एक बैटरी को किसी भी सर्किट में जोड़ा जाता है, तो यह हमारा यह बैटरी के ऋणात्मक से धनात्मक टर्मिनल तक निरंतर आवेश प्रवाह प्रदान करती रहती है। और DC करेंट की प्रत्यावर्ती धारा को दिष्ट धारा में बदलने के लिए ज्यादातर हमलोग  रेक्टिफायर का उपयोग किया करते है।

और हम  इन्वर्टर का भी उपयोग डायरेक्ट करंट को अल्टरनेटिंग करंट में बदलने के ही लिए किया जाता है।

DC current किस तरह से प्रवाहित होता है

दोस्तो DC करंट को आवेश या इलेक्ट्रॉनों के प्रवाह  रूप में जाना जाता है। हम तो जानते ही है कि  धारा की दिशा आवेश के प्रवाह की इसकी दिशा पर निर्भर करती है। क्या आपको पता है कि इलेक्ट्रॉन बैटरी के ऋणात्मक सिरे  से निकल कर बैटरी के धनात्मक सिरे की ओर आराम से प्रवाहित होते हैं।

फिर भी, धारा हमारा DC धारा सकारात्मक से नकारात्मक छोर की दिशा में दिशाओं को इंगित करती है हम जानते है कि इस मे दिशा कोई मायने नही रखती लेकिन ये मैं आपको बस बता रहा हु । सबसे पहले  बेंजामिन फ्रैंकलिन ने यह  देखा कि कंडक्टर के माध्यम से कुछ कुछ चल रहा है।

लेकिन उस समय शायद प्रोटॉन और इलेक्ट्रॉनों की खोज नहीं की जाती थी। इसलिए, वह नहीं वह नही जानते थे  कि कंडक्टर के माध्यम से क्या चल रहा है। उन्होंने  यह माना लिया कि  कि उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र से  निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र में करंट आसानी से प्रवाहित होता है। और उन्होंने उच्च सांद्रता वाले क्षेत्र को सकारात्मक और निम्न सांद्रता वाले क्षेत्र को नकारात्मक कहा या उनका नाम दिया ।

इसलिए, धारा धनात्मक ओर  से ऋणात्मक की ओर प्रवाहित होती है। और इस दिशा को धारा के प्रवाह की पारंपरिक दिशा के रूप में जाना जाता है। इलेक्ट्रॉन और प्रोटॉन के आविष्कार के बाद, यह पुष्टि हो गई है कि वर्तमान बैटरी के नकारात्मक से सकारात्मक छोर तक चलता है। लेकिन फिर भी हम धारा की दिशा को परम्परागत तरीके से ही मान रहे हैं।

DC का खोज किसने किया था ?

गाइस क्या आप जानते है कि DC को सबसे पहले  इतालवी भौतिक विज्ञानी एलेसेंड्रो वोल्टा  की बैटरी द्वारा DC को पेश किया गया था। लगभग उस समय पर धारा की दिशा और उसके बारे में ज्यादा परिचय नहीं दिया गया था। दोस्तो यह एक फ्रासीसी भौतिक विज्ञानी एम्पीयर के बारे में एक राय देते हैं कि वर्तमान आवेस यात्रा एक दिशा में सकारात्मक से नकारात्मक तक जाती है।

गाइस लगभग 19वीं सदी के अंत में, तीन आविष्कारक,थॉमस एडिसन, और निकोला टेस्ला, जॉर्ज वेस्टिंगहाउस  ने बिजली व्यवस्था को चुनने के लिए सबसे बड़ा संघर्ष किया। दोस्तो उसी समय एडिसन की कंपनी ने DC सिस्टम को प्रमुख इलेक्ट्रिक सिस्टम के रूप में ज्यादातर बढ़ावा दिया और कहा कि  यह AC सिस्टम से बहोत बेहतर है। उन्होंने अपने कंपनी के द्वारा पहला पावर प्लांट बनाया और DC पावर को  उसी समय न्यूयॉर्क के कई सारे  घर में ट्रांसमिट करना शुरू किया।

Conclusion-

हमें पूरा उम्मीद है कि आपको हमारा यह आर्तिकाल पसंद आया होगा और आप इसे  पूरा  जरूर पढ़े होंगे। अगर आप इसे पूरा पढ़े होंगे तो आपको  हमारी आर्टिकल में बताई गई सारी बात समझ में आ गई होगी और  और आप DC करेंट क्या है ?, DC का फुल फॉर्म kya होता है?, DC करंट किस तरह से प्रवाहित होता है ,  DC का खोज किसने किया था ?, यह सब जान गए होंगे ।

अगर हमारा यह आर्टिकल से आपको कुछ सीखने को मिला है तो कमेंट सेक्शन में  हमारे लिए कुछ कमेंट जरूर करें लेकिन अगर आपको  हमारे इस आर्टिकल में कुछ बातें समझ में नहीं आई हैं। तो आप हमें कमेंट सेक्शन में बता सकते हैं  हम आप को समझाने की वापस से प्रयास करेंगे

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